Wednesday, March 7, 2018

नारीशक्ति , मातृशक्ति आज पूरे विश्व मे अपनी चमक को बिखेरी हुई है।



आज महिला दिवस है। महिला दिवस के अवसर पर सभी मात्रशक्ति को बधाईया। लीजिए महिला दिवस विशेष पर आज चमोली की उन मात्रशक्ति को सैल्यूट करते है जिन्होंने अपनी काबिलियत, जज्बे, जिद और पहाड़ जैसे बुलंद हौंसलो के बीच अपना मुकाम खुद पाया है। इन सब में एक खास बात यह है कि इन्होने अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर मुमकिन कोशिश और मेहनत की जिस कारण आज पूरी दुनिया उन्हें सलाम करती है।

बोलांदी नंदा – बंसती बिष्ट ! — चमोली के सदूरवर्ती देवाल ब्लाक के ल्वाणी गाँव की रहने वाली बंसती बिष्ट ने विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अपना हौसला नहीं खोया। अपनी माँ बिरमा देवी से लोकसंगीत को आत्मसात करने वाली बंसती बिष्ट ने माँ नंदा के लोकजागरों को गायन के जरिए नया मुकाम दिया है। जिस कारण उन्हें इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्मश्री सम्मान मिला है। लोककला के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्हें ये सम्मान मिला है। आज बंसती बिष्ट देवभूमि का सम्मान है।

मशरूम बिटिया– दिव्या रावत ! — चमोली जनपद के कर्णप्रयाग ब्लाक के कोट कंडारा गाँव से शुरू हुआ मशरूम बिटिया दिव्या रावत का मशरूम मिशन आज उत्तराखंड की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं विदेश में भी दिव्या का मशरूम मिशन अपनी चमक बिखेर रहा है। पलायन रोकने, रोजगार सृजन करने व रिवर्स माइग्रेशन की अलख जगा रही दिव्या रावत को आज महिला दिवस पर राष्ट्रपति भवन में देश के महामहिम राष्ट्रपति महिला शस्क्तिकरण के लिए उनके द्वारा दिए गए सराहनीय योगदान हेतु नारी शक्ति सम्मान 2016 से नवाजेगें। दिव्या आज पूरे देश के युवाओं के लिए रोल माडॅल है।

किरन पुरोहित जयदीप ! — आज जहाँ समाजसेवा के नाम पर उत्तराखण्ड में कई सामाजिक संगठन सरकारी खजाने से पैसा मिलने पर समाजसेवा की बात करते है। लेकिन किरन ने बिना किसी सरकारी मदद के करीब बीस हजार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। किरन पुरोहित ने समाज के पिछड़े वर्ग के उत्थान का काम किया है। 19 अक्टूबर 1969 को उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग में एक साधारण परिवार में जन्मी किरन ने प्रथम श्रेणी से एमएससी भौतिक विज्ञान से किया। अच्छी पढाई लिखाई के वाबजूद किरण ने सरकारी नौकरी को छोड़ समाज के लिए कुछ करने की ठान ली। जिसके लिए उन्होंने साल 1994 में नंदा देवी लोक विकास समिति के नाम से एक संस्था की शुरआत की। महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए किरण ने पहाड़ की महिलाओं को स्वाबलंबी बनाने की दिशा में कदम उठाया। उनकी मेहनत रंग लायी और आज करीब बीस हजार से ज्याद महिलायें और करीब 600 परिवार किरन की मुहिम का हिस्सा बनकर अपना जीवन खुशहाली के साथ जी रहे है। किरन पुरोहित को साल 2016 में जीवा फियोलोजिकल विश्वविद्यालय ने उनके समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी है। साथ ही इन्डियन सॉलिडिट्री बिजिनेस कॉउंसिल ने उन्हें ज्वेल ऑफ़ इंडिया आवार्ड से सम्मानित किया। समाजसेवा के लिए किरन पुरोहित को 10 फरवरी को बैंकॉक में एशिया पैसेफिक ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड से नवाजा गया ।

प्रीति डिमरी बलोदी ! – औली की बर्फीली ढलानों में लकड़ी की खपच्चयों से लेकर जापान के सपोरो में एशियन विंटर गेम्स तक प्रीति के स्कीईगं ने हर किसी को उनका मुरीद बना दिया।
सात साल की उम्र से बर्फ से खेलने वाली रविग्राम जोशीमठ की प्रीति डिमरी आज पूरे विश्व में अपनी चमक बिखेर रही है। प्रीति स्विटजरलैंड व जापान में इंटरनेशनल स्की प्रशिक्षण ले चुकी हैं। वह अब तक विभिन्न स्पर्दाओं में 25 से अधिक स्वर्ण, रजत और कांस्य जीतकर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। प्रीति अब तक 10वीं एशियन चिल्ड्रन अल्पाइनशिप में कोरिया, 11वीं एशियन चिल्ड्रन अल्पाइन चैपियनशिप में लेबनान, 2007 में छठीं एशियन विंटर गेम्स में चाइना में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। गुलमर्ग में 2014 में हुए नेशनल गेम्स और 2017 में जापान के सपोरो में आठवीं एशियन विंटर में प्रतिभाग कर चुकी हैं।

वास्तव में मात्रशक्ति आज पूरे विश्व मे अपनी चमक को बिखेरी हुई है।